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Showing posts from March, 2022

अहसान करना था

      जब हम किसी को हद्द से ज्यादा चाहने लगते है तो उसी दिन से हमारी क़द्र हमारी वैल्यू कचरे के बराबर रह जाती है। फिर चाहे हम मर भी जाये उन्हें तिनका फर्क नहीं पड़ता।      उन्हें हमारी ज़िन्दगी बर्बाद करना था और कर के चल दिए। जैसे वो एक प्लानिंग के साथ आये थे तबाह करने।      कई दिनों से कपडे खरीदने का कहते कहते आज उन्होंने ख़रीदा तो पर अहसान जताने के लिए। हाँ सही भी है मेरी औकात में ही नहीं था कपडे खरीदना, तभी उन्होंने दिया। हम न उनके दोस्त है न उनका प्यार, सिर्फ एक टाइम पास जिसके साथ मर्ज़ी हुआ सेक्स कर लिया और छोड़ दिया। हाँ उनके लिए मैं सेक्स टॉय हूँ जो मूड बनने पे इस्तेमाल कर लिया जाता हैं और फिर कचरे में फेंक दिया जाता है। इस्तेमाल भी एक ही बार हुआ हूँ और मैं पागल हूँ जो इसे प्यार समझ बैठा।      मेरी ख्वाहिश थी की मैं उनके पसंद के कपडे पहनु, उनकी खुशबु मेरे जिस्म में हमेशा रहे पर ये तो मेरी सोच हैं न। ये तो मेरा दिल है न, उन्हें तो नहीं है न प्यार न ही दोस्ती। बार-बार उनका कहना की वो मेरी दोस्त है पर ये कैसी दोस्ती जिसमे महीनो ब...

मर जाओ फिर सब खुश

    ज़िन्दगी ऐसे-ऐसे मोड़ लेती है जिसमे इंसान अगर थोड़ा खुश हो तो उस ज़िन्दगी के लिए ये सबसे बड़ी दुविधा की बात है। आखिरी कोई एक पल के लिए भी खुश हो कैसे सकता है। वक़्त पलटने में ज़रा सा भी समय नहीं लगता की वक़्त भी थोड़ा ठहर जाये और दो पल तो कोई खुश हो ले उससे।           सोचा नहीं था जो वो होता रहा, सँभालने की कितनी ही कोशिशे करते रहा मैं पर उस भगवान को कहाँ मंजूर की इस इंसान को मुस्कुराते कैसे देख सकता हूँ। कभी-कभी लगता है जैसे वो ऊपर से देख के हँसता रहता है मुझे की हाँ आखिर यही वो शख्स है जिसे रोते हुए देखने में भगवान को बोहोत सुकून मिलता है।  मैंने जितना माना जितना भरोशा किया उतना ही उसने मुझे अंदर से तोडा है। कितनी ही श्रद्धा से मैंने महाशिवरात्रि का निर्जला व्रत रखा था पर क्या पता था मैं अपने ही जीवन में अँधेरा लाने के लिए पूजा कर रहा हूँ। जब सारी उम्मीदें मेरी हर तरफ से टूट चुकी थी तब मुझे सिर्फ उस ऊपर वाले पे भरोशा था की चाहे जो हो जाये, पूरी दुनिआ मुँह फेर ले पर ऊपर वाला मुझे टूटने नहीं देगा पर इतना ही मुझे पता होता की वही मेरा दुश्मन है तो म...

भूलना आसान होता है

    सबके लिए कितना इजी होता है न की इतना सब कुछ होने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं था। जिसके लिए दिन-रात सोचते है फिक्र करते है सब बेमायने है उनके लिए।           कभी-कभी मन करता है सब छोड़-छाड़ के कहीं दूर चले जाऊं। इन सब से दूर, इतना दूर की कभी उन्हें याद भी आये और देखने को तरसने लगे मरने लगे तो भी हम उन्हें कभी न दिखे न कभी महसूस हों। ऐसा करीब की रूह से जुड़ा भी रहूं उनके और दूर इतना की वो चाहे मिलना इतना की जान जाये उनकी और मैं कभी उनको नसीब न होऊं। दर्द उन्हें भी प्यार का और तड़प ऐसी की भूख-प्यास मर जाये।           कल जब पता चला की उनकी तबियत बोहोत ख़राब है, उल्टियां हो रही है तो मन मेरा भी बेचैन हुआ। हाल जानने को तरस से गए थे। जी चाहता था की देख लूँ मिल लूँ उनसे, उन्हें सीने से लगा लूँ और वो अपना सारा दर्द भूल जाये। पर ये हो भी कैसे सकता है हम तो उनके लिए एक ढेर कचरे से ज्यादा कुछ भी नहीं। मैसेज करने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया बस कह दिया उन्होंने की "आराम है" और हमे लगा था शायद उनके लिए हम कहीं तो स्...

तरस गए देखने को

     कभी-कभी उन्हें कुछ अजीब ही फीलिंग आती है या कुछ अलग ही मूड में होती है जो कुछ पल साथ में बिताने के बहाने मिल जाते है। ये बहाना तो नहीं था, पर मैं इसे एक बहाना ही कहूंगा जिसे खुदा भी एक बार नसीब हो जाये देखने को पर उसका प्यार कभी नहीं मिलेगा।     मुझे कुछ कपडे लेने थे, कुछ दिनों बाद मेरी कजिन सिस्टर की शादी है और मेरे पास ढंग के कपडे नहीं है शादी में पहनने के लिए तो मुझे कपडे तो लेने ही थे पर मैंने सोचा की जिसकी पसंद मैं था तो क्यों न उसी की पसंद के कपडे लिए जाएँ। मैंने कुछ दिन पहले उन्हें कहा था और इस बारे में बताया था। तब तो उन्होंने कहा था की वो कहेंगी जब फ्री हो जाये तब। जब उनके पास टाइम हो तो मुझे शॉपिंग करने साथ में ले चलने के लिए कहा, बिच में शायद एक आध बार कहा था उन्होंने पर बेमन से कहा था। कल पता नहीं कैसे उन्होंने कहा की आज हम मेरे लिए कपडे लेने जायेगे। ये बात उनके लिए बिलकुल नार्मल होगी जैसे रोज का ही एक कोई छोटा सा काम हो और निपटा के फ्री हो जाओ।      मैं उनके कहने के बाद से ही इतना ज्यादा उत्साहित हो गया था जैसे मुझे जन्नत नसीब हो...