तरस गए देखने को
कभी-कभी उन्हें कुछ अजीब ही फीलिंग आती है या कुछ अलग ही मूड में होती है जो कुछ पल साथ में बिताने के बहाने मिल जाते है। ये बहाना तो नहीं था, पर मैं इसे एक बहाना ही कहूंगा जिसे खुदा भी एक बार नसीब हो जाये देखने को पर उसका प्यार कभी नहीं मिलेगा।
मुझे कुछ कपडे लेने थे, कुछ दिनों बाद मेरी कजिन सिस्टर की शादी है और मेरे पास ढंग के कपडे नहीं है शादी में पहनने के लिए तो मुझे कपडे तो लेने ही थे पर मैंने सोचा की जिसकी पसंद मैं था तो क्यों न उसी की पसंद के कपडे लिए जाएँ। मैंने कुछ दिन पहले उन्हें कहा था और इस बारे में बताया था। तब तो उन्होंने कहा था की वो कहेंगी जब फ्री हो जाये तब। जब उनके पास टाइम हो तो मुझे शॉपिंग करने साथ में ले चलने के लिए कहा, बिच में शायद एक आध बार कहा था उन्होंने पर बेमन से कहा था। कल पता नहीं कैसे उन्होंने कहा की आज हम मेरे लिए कपडे लेने जायेगे। ये बात उनके लिए बिलकुल नार्मल होगी जैसे रोज का ही एक कोई छोटा सा काम हो और निपटा के फ्री हो जाओ।
मैं उनके कहने के बाद से ही इतना ज्यादा उत्साहित हो गया था जैसे मुझे जन्नत नसीब होने वाला था अगले दिन। मेरी ख़ुशी का ठिकाना इसी बात से पता लगाया जा सकता है की मैंने खाना तक नहीं खाया था, ख़ुशी ही इतनी थी की भूख प्यास सब भूल गया था।
पर मैं फिर कैसे भूल गया की ये मेरी कहानी है आखिर इतनी आसानी से कैसे चल सकती है। आज सुबह उनका फिर व्हाट्सएप्प पे मैसेज आया की वो नहीं आ सकती उनकी तबियत ठीक नहीं है। पेट दर्द और उल्टियां हो रही है। मुझे तकलीफ हुई इस बात से पर मुझे फ़िक्र ज्यादा हो रही थी, कैसी होगी कैसे दर्द सेह रही होगी। हाँ उनके पास बोहोत लोग है ख्याल रखने के लिए, पूरी दुनियां है उनके क़दमों पे तो, बस एक मेरा फिक्र करने से उन्हें क्या फर्क पड़ता। मैं उनके लिए दूर पड़ा एक पत्थर हूँ जो कभी यहाँ तो कभी वहां पड़ा रहता है।
मैंने रिप्लाई में बस इतना ही कहा की "कोई बात नहीं आप रेस्ट कीजिये.. कपडे रहने दीजिये।आप अपना ख्याल रखना हमेशा।" ये बात उनके लिए किसी कंपनी के मैसेज से ज्यादा नहीं था जिसे सिर्फ इग्नोर कर दिया जाता है और आप अपनों के साथ बातें करते रहते है। मेरे रिप्लाई करने के बाद मैं उनके रिप्लाई का वेट करने लगा की कब उनका मैसेज आएगा,
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