अहसान करना था
जब हम किसी को हद्द से ज्यादा चाहने लगते है तो उसी दिन से हमारी क़द्र हमारी वैल्यू कचरे के बराबर रह जाती है। फिर चाहे हम मर भी जाये उन्हें तिनका फर्क नहीं पड़ता।
उन्हें हमारी ज़िन्दगी बर्बाद करना था और कर के चल दिए। जैसे वो एक प्लानिंग के साथ आये थे तबाह करने।
कई दिनों से कपडे खरीदने का कहते कहते आज उन्होंने ख़रीदा तो पर अहसान जताने के लिए। हाँ सही भी है मेरी औकात में ही नहीं था कपडे खरीदना, तभी उन्होंने दिया। हम न उनके दोस्त है न उनका प्यार, सिर्फ एक टाइम पास जिसके साथ मर्ज़ी हुआ सेक्स कर लिया और छोड़ दिया। हाँ उनके लिए मैं सेक्स टॉय हूँ जो मूड बनने पे इस्तेमाल कर लिया जाता हैं और फिर कचरे में फेंक दिया जाता है। इस्तेमाल भी एक ही बार हुआ हूँ और मैं पागल हूँ जो इसे प्यार समझ बैठा।
मेरी ख्वाहिश थी की मैं उनके पसंद के कपडे पहनु, उनकी खुशबु मेरे जिस्म में हमेशा रहे पर ये तो मेरी सोच हैं न। ये तो मेरा दिल है न, उन्हें तो नहीं है न प्यार न ही दोस्ती। बार-बार उनका कहना की वो मेरी दोस्त है पर ये कैसी दोस्ती जिसमे महीनो बात नहीं होती, महीनो एक दूसरे को नहीं देखते। जब आप न ही मिलना चाहो न ही बात करना चाहो तो किस बात के कपडे लिए मेरे लिए। अहसान क्यों जताया की वो मेरी ज़िन्दगी में है।
वफादार दोस्त कहती है, असल में वो मुझे कुत्ता कहती है। वफादार कुत्ते जैसा ही हूँ मैं उनके लिए जो हर वक़्त उनके लिए हाज़िर रहता है। एक बार कह दो ये करना है तो चाहे जान चली जाये पर वो काम हो के रहता है चाहे जैसे हो। पर उन्हें क्या फर्क पड़ता है की बंदा किस हाल में है।
मैंने पैसे ट्रांसफर किये भी तो वापस कर दिए। बोली की भीख मांग के नहीं कहती जो पैसे दे रहे हो। और मैं देता भी क्यों न सरे हक़ ख़त्म कर दिए थे। किस रिश्ते से किस हक़ से ये कपडे लेता मैं।
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