3 महीने रोए
वो तीन महीने मेरी ज़िन्दगी के काले दिन थे। मुझे जिसकी खुद से भी ज्यादा फिक्र थी, जिसके लिए मैं तड़पता रह गया। उसे जरा भी फर्क न पड़े मेरे हाल से। मैं 3 महीने कैसे जी रहा था कैसे सो रहा था कोई नहीं था मेरा हाल पूछने वाला।
तेरे साथ जीने का हक़ नहीं तो अपनी बाँहों में मरने की इजाज़त दे दे