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Showing posts from August, 2017

खामोशियाँ

यहाँ सब खामोश हैं, कोई आवाज़ नहीं करता. सच बोलकर कोई किसी को, नाराज़ नहीं करता.

नज़रिया बदल गया

कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया     न शकल बदली न ही बदला मेरा किरदार बस लोगों के देखने का नजरिया बदल गया...

अजीब शायर हूँ मैं

अजीब किस्म का शायर हूँ में भी..!! - सिर्फ एक वाह के लिये कई दर्द सुना देता हूँ..!!