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Showing posts from January, 2022

ज़िन्दगी ख़त्म

ज़िन्दगी जैसी कुत्ती चीज़ कोई नहीं।  अगर थोड़ा सा मैं भी रूठ जाऊं तो ज़िन्दगी भी साथ छोड़ देती है, एक ही पल में कह देती है मज़बूरी में जी रहा है तू, जा आखिरी सांसे भी ले ले। बोझ बनने से बेहतर मुझे यही लगता है। रो लेना ज्यादा बेहतर है पर प्यार की भिखना मांगना इस दुनिआ में पाप है। मैंने ये पाप रोज किया है। किसी एक लिए मैंने खुद को रोज दर्द दिया है, हाथ चीर के उसका नाम लिखा है। हाथ की नशों का खून बहा दिया है उस एक शख्स के लिए जिसने ज़िन्दगी से नफरत करना सिखा दिया। क्या पता था इतना प्यार हो जायेगा, जो किस्मत में कभी हो ही नहीं सकता उसके लिए इतना परेशान ही क्यों होना। ये दिल भी बड़ी अजीब चीज़ होती है, इसके आगे चाहे लाख कोई अपना प्यार लेके आ जाये पर इसे वही एक शख्स चाहिए जिसे वो अपना सब कुछ मान चूका है। फिर चाहे उस शख्स के आगे आप अपनी जान भी दे दो  पर उसे रत्ती भर फर्क न पड़े।      जो नहीं होना था वही हो गया, लाख दिमाग के कहने के बाद भी ये दिल नहीं माना। आखिर वही किया जिससे लाख मन्नतें मानने के बाद प्यार वापस मिला और हमेशा के लिए दूर हो गया। ज़िन्दगी भी क्या खेल खेलती है जो नहीं...

उम्मीद टूट गयी

 कभी-कभी मन जब हद्द से ज्यादा उदास हो जाता है और बात करने के लिए जब कोई नहीं होता आपके पास तब जीने की भी उम्मीद ख़त्म हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ पिछले दिन, मेरी बोहोत इच्छा थी उनसे मिलने की और प्यार करने की पर शायद खुदा को ही ये मंजूर नहीं था। उसने नसीब से फिर दूर कर दिया उसे, न जाने ये क्यों बार-बार मेरी जान का दुश्मन बनता जा रहा है।  मेरा दिल पूरी तरह से टूट गया था, अब कोई रौशनी न ही कोई छोटी सी भी उम्मीद बची थी तुझे चाहने की। तूने खुद से मुझे दूर कर दिया, न चाहते हुए भी मैंने फिर से प्यार कर लिया। उम्मीद भी बोहोत गलत चीज़ होती है, लोगो को बहुत मजबूती से जोड़ के रखती है और जब टूटते हैं तो आवाज़ तो नहीं आती पर दिल चीख-चीख के रोटा है, आदमी की मौत उसी वक़्त उसके अंदर हो जाती है। जिसकी कोई आवाज़ नहीं होती पर वो अब किसी लायक भी नहीं रहता।  मैंने रात में स्टेटस लगाया लगभग 150-170 स्टेटस होंगे व्हाट्सप्प पे। मैं पूरी तरह अकेला था किसी से बात करने का मैं नहीं था। जिससे बात करना था वो मुझसे बात नहीं करना चाहता था, और न ही मैंने कोई ज़िद्द की। जब उसका मैं होता वो मुझसे बात करती। यही सोच...

आख़िरी दिन ज़िंदगी का

उम्मीदों से भरी इस ज़िंदगी में अब बेरंग हुए चले हम। बोहोत कोशिशों दुआओं के बाद भी मैं किसी की चाहता नहीं पा सका। मैंने तेरे नाम से हर मंदिर, घाट पर जाके मन्नतें माँगी हैं तुझे अपना बनाने की पर सारी मन्नतें इस तरह मेरी टूटेंगी कभी सोचा नहीं था। टूटे दिल की कोई आवाज़ नहीं होती पर उसका दर्द हद्द से ज़्यादा होता है।  ये साल शुरू होते ही मनहूस निकल गया, मिलने के वादे शुरू में टूट गए।आज जो खबर मिली उसने हद्द से ज़्यादा चूर कर दिया मुझे। अब बोलने से कोई फ़ायदा नहीं। अब मिलना नामुमकिन है, उम्मीद का जहां दीपक जल रहा था आज वह एक भी किरण अब नहीं रही। आज खुद को मरते हुए देखा है। जोश भरे हुए एक लड़के को मरते हुए देखा है। ये राधा कृष्णा सब झूठ है फ़रेबी है। झूठी कहानी झूठे लोग, असल में तो पुराने जमाने के लोगों ने अपने मनोरंजन के लिए ये सारी कहानियाँ लिखी हैं। इनसे कोई उम्मीद या वफ़ा नहीं की जा सकती है। प्यार की मिसाल बने राधा कृष्णा सब झूठी अफ़वाह है। जब ज़िंदगी की हक़ीक़त से रूबरू हुए तो हर तरफ़ तमाचे खाए हैं। कौन कहता है राधा कृष्णा का प्यार सच्चा था, राधा ने कभी नहीं चाहा था कृष्णा को। आख़िर ...

भूख नहीं लगी

सुना है कि रात में बिना खाए सोते हैं तो भगवान को तकलीफ़ होती है, उसे दर्द होता है। ऐसा इस लिए की हम उसके बच्चे हैं और किसी का बच्चा भूखे पेट सोए तो माँ-बाप को तकलीफ़ होता है अपने बच्चे को भूख देख। उसका एक और वादा था नए साल का मुँह मीठा कराना। वो अपने हाथों से मेरे लिए स्पेशली कुछ मीठा बना कि लाने वाली थी। पर ये तो इश्क़ हैं न जनाब, बिना आंसू छलकाए प्यार कहाँ मिलता है। उनके किए वादे से मैं दिल ही दिल से बोहोत-बोहोत ज़्यादा खुश था। इतना की एक जनवरी का दर्द भूल ही गया था। अब मुझे सिर्फ़ उनके हाथ का ज़ायक़ेदार खाना खाना था। सुबह होते ही रोज़ की तरह मोर्निंग विश किया और दिन के साथ मैं भी इंतेज़ार में बढ़ता चला जा रहा था। बात रही थी 11 बजे की और उनका मेसिज आया की आज छुट्टी है, तो परिवार के साथ कहीं बाहर मंदिर को जा रहे हैं। ये सुनते ही मेरा दिल ऐसा बैठा की एक पल को मैं साँस तक नहीं ले पाया। दिल अचानक ही भभक पदा और अंदर ही अंदर आँखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ गया। मैंने इस बात की ज़रा सी भी या कहो तो तिनके भर की भी उम्मीद नहीं की थी की कुछ ऐसा भी होगा। मैं सुबह उठते ही सबसे पहले उसके खाने के ब...

तेरा वादा

एक लड़का तब मायूस हो जाता है जब वो किसी की सारी ज़िद्द मान लेता है पर वो उस एक ज़िद्द पे हार जाता है जो होता दोनो के लिए है। मैं उसे याद तक नहीं था की आज हमें मिलना है। उसके किए हुए वादे सब झुटे थे।  बीती रात हम बातें कर रहे थे की 31st है क्या पार्टी चल रही है तो मैंने कहा की कुछ नहीं बस घर हूँ बैठा हूँ। वो भी पार्टी नहीं कर रही थी, हालाँकि उसे पसंद भी नहीं पार्टी करना। फिर हमने 1 जनवरी नए साल पे मिलने का सोचा। वो किसी के साथ आ रही थी और मुझे आने को कहा तो मैंने मना कर दिया की कोई साथ में होगा तो हम खुल के बात नहीं कर पाएँगे हमारी प्राइवसी की दिक़्क़त होगी। पर उसकी ज़िद्द थी की आना है। तो मैंने कहा की क्या फ़ायदा जब हम मिल ना पाएँ बात ना कर पाएँ, तो उनका जवाब यही था की क्या फ़ायदे के लिए ही मिलोगे (ये बात मैं उसे कहता था जब मैं उसे बुलाया करता था। उसके लिए मेरा बुलाना मतलब सेक्स करना ही था, ग़लत समझना एक हद्द तक ठीक है पर मैंने दिल से उसे सिर्फ़ मिलने की गुज़ारिश की थी की उसे छू सकूँ और देख सकूँ, इतनी सी ख्वाहिश थी मेरी उससे और सेक्स की बात तो मैं उसकी इजाज़त के बिना उसे छूता तक नह...