आख़िरी दिन ज़िंदगी का
उम्मीदों से भरी इस ज़िंदगी में अब बेरंग हुए चले हम।
बोहोत कोशिशों दुआओं के बाद भी मैं किसी की चाहता नहीं पा सका। मैंने तेरे नाम से हर मंदिर, घाट पर जाके मन्नतें माँगी हैं तुझे अपना बनाने की पर सारी मन्नतें इस तरह मेरी टूटेंगी कभी सोचा नहीं था।
टूटे दिल की कोई आवाज़ नहीं होती पर उसका दर्द हद्द से ज़्यादा होता है।
ये साल शुरू होते ही मनहूस निकल गया, मिलने के वादे शुरू में टूट गए।आज जो खबर मिली उसने हद्द से ज़्यादा चूर कर दिया मुझे। अब बोलने से कोई फ़ायदा नहीं। अब मिलना नामुमकिन है, उम्मीद का जहां दीपक जल रहा था आज वह एक भी किरण अब नहीं रही। आज खुद को मरते हुए देखा है। जोश भरे हुए एक लड़के को मरते हुए देखा है।
ये राधा कृष्णा सब झूठ है फ़रेबी है। झूठी कहानी झूठे लोग, असल में तो पुराने जमाने के लोगों ने अपने मनोरंजन के लिए ये सारी कहानियाँ लिखी हैं। इनसे कोई उम्मीद या वफ़ा नहीं की जा सकती है। प्यार की मिसाल बने राधा कृष्णा सब झूठी अफ़वाह है। जब ज़िंदगी की हक़ीक़त से रूबरू हुए तो हर तरफ़ तमाचे खाए हैं। कौन कहता है राधा कृष्णा का प्यार सच्चा था, राधा ने कभी नहीं चाहा था कृष्णा को। आख़िर में धोखा दे के किसी और के साथ चली ही गयी और कृष्ण रोता रह गया पर उसके आंसुओं की क़ीमत राधा की नज़रों में दो कोड़ी की भी नहीं थी।
मैं तेरे लिए ज़िंदगी के हर उतर चढ़ाव को आराम से सह सकता हूँ, उसे सम्भाल सकता हूँ। पर जब खुद चूर-चूर होके टूट जाए तो मेरा सहारा कौन बनेगा। पापा के चले जाने के बाद घर को सम्भाल रहा हूँ। इतनी सी उमर में कौन कर पता है ये सब, मैं अपने सिने पे सर पे चुभती धूप, बारिश, सर्दी, तूफ़ान, ख़ंजर अपने सिने पे रोज़ लेता हूँ। आज तक किसी को अंदाज़ा तक नहीं लगा कि क्या-क्या मैं झेल रहा हूँ।
अपने परिवार का सहारा हूँ मैं। पर मेरा सहारा कौन है, जब ज़िंदगी ने मुझे तुझे दिया तो उम्मीद की नयीं किरण दिखी। तुझमें मैंने अपनी ज़िंदगी देखा है। तेरे मैं अपना बुढ़ापा देखना चाहता था और तूने एक पाल ना लगाया उसे चूर करने में।
जब तू है मेरी तो तुझसे किसी चीज़ की उम्मीद क्यूँ ना करूँ, वफ़ा की उम्मीद क्यूँ ना करूँ।
तू कहती है तू मुझे राधा जैसी चाहती है, तो बीच सफ़र में साथ छोड़ के क्यूँ चली गयी। तुझसे प्यार ही तो माँगा है, कोई महँगी चीज़ नहीं है। पर तूने जैसा खेला है मेरे साथ आज पता चला प्यार इस दुनिया की सबसे महँगी चीज़ हैं।
हम ग़रीबों के लिए प्यार नहीं होता। ये सब अमीरों की चीजें हैं। ये सब उनके नसीब में होता है। हमें प्यार में सिर्फ़ दर्द मिलता है और धोखा।
ऊपर वाले ने मेरे हिस्से में प्यार नहीं दर्द लिख के भेजा है।
आज मैंने दिल से दुआ माँगा ऊपर वाले से, मेरी ज़िंदगी की सिर्फ़ दो ही ख्वाहिशें हैं।
एक या तो तेरा साथ ज़िंदगी भर या तो मेरी मौत।
कहते हैं शाम को माँगी हुई दुआएँ जल्दी पूरी होती हैं। आज मैंने भी खुले आसमान के नीचे शाम को इस दुआ को माँगा हैं। आज मेरी ज़िंदगी का ये आख़िरी रात हैं।
उम्मीद करता हूँ ये दुआ तो ऊपर वाला पूरा करेगा, आख़िर हूँ तो मैं उसका दुश्मन ही।
ज़िंदगी की आख़िरी रात है, याद रखना दोस्तों जब जलूँ मैं तो आना ज़रूर और रोना मत।
और उसे कहना जो उसके लिए लिया था वो पहन के ज़रूर आए। आख़िरी बार उसे अपने दिए हुए कपड़ों में देखना चाहता हूँ।
अलविदा…😊
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