तेरा वादा

एक लड़का तब मायूस हो जाता है जब वो किसी की सारी ज़िद्द मान लेता है पर वो उस एक ज़िद्द पे हार जाता है जो होता दोनो के लिए है।

मैं उसे याद तक नहीं था की आज हमें मिलना है।

उसके किए हुए वादे सब झुटे थे। 

बीती रात हम बातें कर रहे थे की 31st है क्या पार्टी चल रही है तो मैंने कहा की कुछ नहीं बस घर हूँ बैठा हूँ। वो भी पार्टी नहीं कर रही थी, हालाँकि उसे पसंद भी नहीं पार्टी करना। फिर हमने 1 जनवरी नए साल पे मिलने का सोचा। वो किसी के साथ आ रही थी और मुझे आने को कहा तो मैंने मना कर दिया की कोई साथ में होगा तो हम खुल के बात नहीं कर पाएँगे हमारी प्राइवसी की दिक़्क़त होगी। पर उसकी ज़िद्द थी की आना है। तो मैंने कहा की क्या फ़ायदा जब हम मिल ना पाएँ बात ना कर पाएँ, तो उनका जवाब यही था की क्या फ़ायदे के लिए ही मिलोगे (ये बात मैं उसे कहता था जब मैं उसे बुलाया करता था। उसके लिए मेरा बुलाना मतलब सेक्स करना ही था, ग़लत समझना एक हद्द तक ठीक है पर मैंने दिल से उसे सिर्फ़ मिलने की गुज़ारिश की थी की उसे छू सकूँ और देख सकूँ, इतनी सी ख्वाहिश थी मेरी उससे और सेक्स की बात तो मैं उसकी इजाज़त के बिना उसे छूता तक नहीं) । पर फिर भी मैंने मना कर दिया तो बोली की फ़ोन करूँगी आ जाना।

1 जनवरी आया सुबह विश किया और वो मुझे भूल गयी। दिन भर में ना एक मेसिज ना कोई बात, फिर भी पूरे दिन मैं चेहरे पे मुस्कुराहट लिए उसका इंतेज़ार कर रहा था। दिन जाता रहा और शाम हो गयी और मेरी आस मेरी उम्मीद टूटने लगी पर फिर भी सोचा अंधेरा होने तक शायद वो कॉल कर ले पर उसने नहीं किया। 

इंसान को तब तक ही याद किया जाता है जब तक ज़रूरत हो, उसने मेरा फ़ायदा हो यही सोच के मुझे ग़लत मान लिया। 

उसकी राह में मैं पूरे दिन तो भूखा ही रहा और रात हुई तो सोचा की आज उसके नाम का व्रत ही सही। कम से कम दुआ में ये तो क़ुबूल हो जाएगा।

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