भूख नहीं लगी
सुना है कि रात में बिना खाए सोते हैं तो भगवान को तकलीफ़ होती है, उसे दर्द होता है।
ऐसा इस लिए की हम उसके बच्चे हैं और किसी का बच्चा भूखे पेट सोए तो माँ-बाप को तकलीफ़ होता है अपने बच्चे को भूख देख।
उसका एक और वादा था नए साल का मुँह मीठा कराना। वो अपने हाथों से मेरे लिए स्पेशली कुछ मीठा बना कि लाने वाली थी। पर ये तो इश्क़ हैं न जनाब, बिना आंसू छलकाए प्यार कहाँ मिलता है।
उनके किए वादे से मैं दिल ही दिल से बोहोत-बोहोत ज़्यादा खुश था। इतना की एक जनवरी का दर्द भूल ही गया था। अब मुझे सिर्फ़ उनके हाथ का ज़ायक़ेदार खाना खाना था। सुबह होते ही रोज़ की तरह मोर्निंग विश किया और दिन के साथ मैं भी इंतेज़ार में बढ़ता चला जा रहा था। बात रही थी 11 बजे की और उनका मेसिज आया की आज छुट्टी है, तो परिवार के साथ कहीं बाहर मंदिर को जा रहे हैं। ये सुनते ही मेरा दिल ऐसा बैठा की एक पल को मैं साँस तक नहीं ले पाया। दिल अचानक ही भभक पदा और अंदर ही अंदर आँखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ गया। मैंने इस बात की ज़रा सी भी या कहो तो तिनके भर की भी उम्मीद नहीं की थी की कुछ ऐसा भी होगा।
मैं सुबह उठते ही सबसे पहले उसके खाने के बारे में सोचने लगा था। उनके हाथ का खाना जो मेरे लिए आएगा, और मैं बोहोत प्यार से खाऊँगा और उनके हाथों को चूम लूँगा। सुबह सिर्फ़ चाय पी के बैठा इंतेज़ार कर रहा था।
कुछ खा नहीं रहा था, की उनके खाने का स्वाद ही मेरे जहन में रहे और और किसी भी चीज़ को नहीं छूँगा न ही खाऊँगा। पर ये मेरी क़िस्मत है, ये अमित का नसीब है। मुझे मेरे हिस्से का खाना-प्यार ही नसीब नहीं हुआ।
मेरा नया साल कुछ इस तरह शुरू होगा ये मैंने बिलकुल नहीं सोचा था। मैंने आज 1-1 सेकंड घड़ी में, मोबाइल में देखते हुए निकाला था। बस यही दिल में था की अब वो मुझे मेसिज करेंगी या कॉल करेंगी। पर एक मेसिज जिससे मेरा दिल पूरी तरह टूट गया।
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