ज़िन्दगी ख़त्म

ज़िन्दगी जैसी कुत्ती चीज़ कोई नहीं। 
अगर थोड़ा सा मैं भी रूठ जाऊं तो ज़िन्दगी भी साथ छोड़ देती है, एक ही पल में कह देती है मज़बूरी में जी रहा है तू, जा आखिरी सांसे भी ले ले। बोझ बनने से बेहतर मुझे यही लगता है। रो लेना ज्यादा बेहतर है पर प्यार की भिखना मांगना इस दुनिआ में पाप है। मैंने ये पाप रोज किया है। किसी एक लिए मैंने खुद को रोज दर्द दिया है, हाथ चीर के उसका नाम लिखा है। हाथ की नशों का खून बहा दिया है उस एक शख्स के लिए जिसने ज़िन्दगी से नफरत करना सिखा दिया। क्या पता था इतना प्यार हो जायेगा, जो किस्मत में कभी हो ही नहीं सकता उसके लिए इतना परेशान ही क्यों होना। ये दिल भी बड़ी अजीब चीज़ होती है, इसके आगे चाहे लाख कोई अपना प्यार लेके आ जाये पर इसे वही एक शख्स चाहिए जिसे वो अपना सब कुछ मान चूका है। फिर चाहे उस शख्स के आगे आप अपनी जान भी दे दो  पर उसे रत्ती भर फर्क न पड़े। 

    जो नहीं होना था वही हो गया, लाख दिमाग के कहने के बाद भी ये दिल नहीं माना। आखिर वही किया जिससे लाख मन्नतें मानने के बाद प्यार वापस मिला और हमेशा के लिए दूर हो गया। ज़िन्दगी भी क्या खेल खेलती है जो नहीं करना चाहिए वही करवा के मानती है फिर लाख रोने के बाद भी कुछ सही नहीं होता और न सही होने देता है। 

    मैंने बोहोत कोशिशों के बाद बोहोत मन्नतों के बाद उसे पाया था, हर एक दरवाजे हर एक मंदिर, आकाश पक्षी नींद सपने बेहोशी पानी पीते हर वक़्त उसी का नाम लेता रहा हर वक़्त उसे सीने से लगाने की चाह में तड़पता मरता रहा। आखिर कैसे उसे खुद से जुदा कर सकता हूँ, आखिर वो मेरा पहला प्यार है। मैं उसे मनाने के लिए हर एक कोशिश अपनी आखिरी साँस तक करूँगा, उसे मनाना भी कैसे छोड़ दू जिसे मैंने खुद रोते हुए माँगा है। मेरे हर आंसुओ में उसके लिए फ़िक्र भी है और नाराज़गी भी है। मैं चाहु भी तो उससे नाराज़ नहीं हो सकता, मैं जानता हूँ वो मुझे मनाने नहीं आएगी।

    कई दिनों से बात नहीं हो कर रही थी वो और मैं तड़प रहा था उसे देखने के लिए बात करने के लिए चाहे जैसे हो जाये मैं उसे सुन लूँ उससे बात कर लूँ पर क्या पता था मैं किसी की ज़िन्दगी में सिर्फ एक ऑप्शन हूँ जिस जब मर्ज़ी हो यूज़ कर लो और छोड़ दो। मैं अब उसके लिए बोझ बन गया था जिसे वो रोज अपने सीने पे लिए ढो रही थी। आखिरी थोड़े से नाराज़गी पे कौन एकदम से रिश्ता ख़त्म कर देता है। आखिरी उसी ने तो मुझसे प्यार किया था, उसी की तो मैं पसंद था फिर आज उसके लिए मैं उसकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती कैसे बन गया। 
   
    मुझे मेरी गलती का अहसास हुआ जब उसने कहा व खुद परेशान थी उसकी तबियत ख़राब थी। मैंने भी अपनी नाराज़गी दूर की और उसे प्यार से मनाने लगा पर उसने रिश्ता ख़त्म करना ज्यादा बेहतर समझा और मुझे लगा मैं उसे मना लूंगा। मैंने अपना सारा प्यार एक बार में उसके कदमो पे रख दिया। 


कितनी ही कोशिशें कर लो पर ये कभी मानने वाला नहीं है। 

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