उम्मीद टूट गयी
कभी-कभी मन जब हद्द से ज्यादा उदास हो जाता है और बात करने के लिए जब कोई नहीं होता आपके पास तब जीने की भी उम्मीद ख़त्म हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ पिछले दिन, मेरी बोहोत इच्छा थी उनसे मिलने की और प्यार करने की पर शायद खुदा को ही ये मंजूर नहीं था। उसने नसीब से फिर दूर कर दिया उसे, न जाने ये क्यों बार-बार मेरी जान का दुश्मन बनता जा रहा है।
मेरा दिल पूरी तरह से टूट गया था, अब कोई रौशनी न ही कोई छोटी सी भी उम्मीद बची थी तुझे चाहने की। तूने खुद से मुझे दूर कर दिया, न चाहते हुए भी मैंने फिर से प्यार कर लिया। उम्मीद भी बोहोत गलत चीज़ होती है, लोगो को बहुत मजबूती से जोड़ के रखती है और जब टूटते हैं तो आवाज़ तो नहीं आती पर दिल चीख-चीख के रोटा है, आदमी की मौत उसी वक़्त उसके अंदर हो जाती है। जिसकी कोई आवाज़ नहीं होती पर वो अब किसी लायक भी नहीं रहता।
मैंने रात में स्टेटस लगाया लगभग 150-170 स्टेटस होंगे व्हाट्सप्प पे। मैं पूरी तरह अकेला था किसी से बात करने का मैं नहीं था। जिससे बात करना था वो मुझसे बात नहीं करना चाहता था, और न ही मैंने कोई ज़िद्द की। जब उसका मैं होता वो मुझसे बात करती। यही सोच के पूरा दिन निकाल दिया पर उसका एक भी मैसेज नहीं आया।
थक हार के मैंने स्टेटस पे डाल दिया और छोड़ दिया। देखती तो देखती और रिप्लाई करती तो करती। यही मान के सो गया की जो होगा अगले दिन देखा जाएगा।
सुबह हुई और नींद जल्दी खुल गयी, दरअसल मैं सो ही नहीं पाया सारी रात और जगता रहा। फिर सुबह 5 बजे मुझे 1 घंटे के लिए नींद आ गयी और मैं जाग गया। फिर वही रोज की तरह मोबाइल उसे करने लगा और इंतज़ार कर रहा था की वो मुझे मॉर्निंग विश करे।
खैर थोड़ी देर में उसका मॉर्निंग विश हुआ लगभग 6.30 पे। जिसका इंतज़ार था वही हुआ और मैंने देख के रिप्लाई करना चाहा फिर इतने में उसका दूसरा मैसेज आया। वो मेरे स्टेटस का रिप्लाई था। मैं सब कुछ नोटिफिकेशन से देख रहा था। फिर कुछ सेकंड लगे और मुझे लगा रिप्लाई नहीं आएगा। हालाँकि मुझे पता नहीं था की वो मेरे स्टेटस का रिप्लाई कर रही है।
फिर अचानक ही काफी सारे रिप्लाई आने शुरू हो गए, फिर मुझे पता चला की ये मेरे स्टेटस का ही जवाब है जो भी छोटे-छोटे रिप्लाई थे।
जितने भी रिप्लाई आये सारे पॉजिटिव रिप्लाई थे और मेरे साथ ही रहने की बातें थी उसके रिप्लाई में।
उम्मीद नहीं किया था मैंने की रिप्लाई भी आएगा, आखिर क्यों ही रिप्लाई आता आखिर उसके लिए मैं सिर्फ एक टाइम पास था। जैसे उसके रिप्लाई आये मेरे दिल को भी सुकून मिलता गया। मेरे 150 स्टेटस में से सारे स्टेटस का रिप्लाई किया।
फिर मैंने भी खुद को संभाला और फ्रेश होने गया, मैंने सोचा की सब काम से फ्री होकर उसके रिप्लाई देखूगा और जवाब दूंगा। एक-एक मैसेज देखे मैंने और उनके रिप्लाई करने लगा। बाते उनकी भी सारी सही थी पर उसमे अपना पन नहीं था, बस ऐसा लगा जैसे मुझे किसी ने भीख में प्यार दे दिया। आखिर मैं भिखारी ही तो बन गया था उसके आगे। हर वक़्त प्यार-प्यार करने लगा था।
पैसे भी मांगता तो शायद वो जल्दी मिल जाता पर प्यार कभी नहीं मिलेगा। मेरे दिल में बस यही आ रहा था की कोई थोड़ी सी रौशनी दे दे मुझे की इस जगह से निकल जाऊ।
वो मुझे समझाने लगी और अपनी जिम्मेदारियां बताने लगी, शायद मैं गलत इंसान उसकी ज़िन्दगी में आ गया और उसकी ज़िन्दगी तबाह करने लगा था। लाख उसके कहने के बाद भी मैं सिर्फ प्यार ही करता रहा।
उसका कहना भी सही था की मुझे इतना पागल नहीं होना चाहिए पर होता भी क्यों न, आखिर में जिसकी ख्वाहिश दिल में है वही न मिले तो दर्द होना ही है। अब मैं चाहे रोके जी लूँ या हँसते हुए रोज दिन बिताते जाऊ। 10 उसका वीडियो कॉल आया और समझाने लगी मानाने लगी। अगर वो वीडियो कॉल न करती तो मैं ऑफिस भी नहीं जाता, शायद लाश ही बन के पड़ा रहता। उसके वीडियो से काफी सुकून मिला, उसे दूर से ही देखने को मिला। महीनो की ख्वाहिश जैसे पूरी सी हो गयी।
आखिर में ये दिन आज अच्छा बिता। कुछ हसीन ख्वाब जैसा पर अच्छा सा।
very nice line dear
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