इश्क़ से क्या नाराज़गी
रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी,
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी,
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी,
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।
रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी,
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी,
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी,
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।
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