सन्नाटा सा
फिर सन्नाटा सा पसरा है
फिर खाली-ख़ाली सा लगता है
फिर मन में सूनापन आया
फिर नभ सा एकांत दिखता है
फिर नींद उचटती है मेरी
तू दूर-दूर सा लगता है
फिर खाली-ख़ाली सा लगता है
फिर मन में सूनापन आया
फिर नभ सा एकांत दिखता है
फिर नींद उचटती है मेरी
तू दूर-दूर सा लगता है
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